संपादकीय - किससे दिल की बात कहूँ?
साहित्य कुञ्ज के इस अंक में
कहानियाँ
अमित सुधर गया
एक शहर में अमित नाम का एक नटखट लड़का रहता था। वह स्कूल जाता तो था, लेकिन पढ़ाई से ज़्यादा दोस्तों के साथ खेलने-कूदने में व्यस्त रहता। मम्मी कहतीं, “बेटा, होमवर्क कर लो।” पापा चिल्लाते, “पढ़ाई पर ध्यान दो, आगे पढ़ें
आमार सोनार बांग्ला
यह वर्ष पूरे दक्षिण एशिया के लिए उथल-पुथल भरा था। पूर्वी पाकिस्तान भी धीरे-धीरे विद्रोह की आग में जलने लगा था। दरअसल बात यह थी कि पश्चिमी पाकिस्तान की सत्ता हमेशा से पूर्वी पाकिस्तान के लोगों के साथ भेदभाव आगे पढ़ें
चट मँगनी पट ब्याह
अनवरत लिखने-पढ़ने की आदत कमज़ोर पड़ती जा रही है, और मोबाइल पर रील देखने की प्रगाढ़। जब रील से परिचित नहीं था तो महीने में कई किताबें, कहानियाँ, कविताएँ, व्यंग्य आदि पढ़ना और लिखना कोई बड़ी बात नहीं थी, आगे पढ़ें
छींके पर चढ़ा पकड़ा गया चोर: नाम है पनीर
जब से नेताओं ने सफ़ेद टोपी पहननी शुरू की है, तब से सफ़ेद यानी पवित्र—इस पर से भरोसा उठ गया है। मंत्री ने सेक्रेटरी को बुला कर पूछा, “बताओ, हमारे राज में कोई दुखी है क्या?” सेक्रेटरी गिड़गिड़ाते हुए आगे पढ़ें
परी और दादी का चश्मा
परी आज शाम जैसे ही स्कूल से लौटी तो उसने देखा उसकी दादी अपनी आँखों पर चश्मा लगाए हुए अख़बार पढ़ रही हैं। परी ने चहकते हुए कहा, “अरे! वाह! दादी, आपकी आँखों पर तो यह चश्मा बहुत ही आगे पढ़ें
पश्चात्ताप
ऋतु को तितलियाँ बहुत अच्छी लगती थीं, पर वह उनके साथ ग़लत खेल खेलता था। वह तितलियों को पकड़कर उनके रंग-बिरंगे पंख तोड़ देता था। बेचारी तितलियाँ फड़फड़ाकर ज़मीन पर गिर जातीं, उड़ नहीं पातीं, पर ऋतु को यह आगे पढ़ें
बंदर की दुष्टता
एक घने जंगल में एक ऊँचा पेड़ था। उसकी मज़बूत डाल पर हर रात सारे पक्षी सोने आते। कोयल, बुलबुल, तोता, कबूतर—सभी यहीं विश्राम करते। लेकिन एक शरारती बंदर इस पेड़ का दुश्मन था। वह रात को चुपके से आगे पढ़ें
यहाँ जीवन का अंत भी बिकता है
जहाँ मैं पढ़ाता हूँ, ठीक उसके बग़ल में एक आर.टी.ओ. कार्यालय है। रोज़ सुबह जब स्कूल पहुँचता हूँ, तो वहाँ खड़ी नई-नई चमचमाती गाड़ियों की लंबी क़तार देखकर मन खिल उठता है। उनका सौंदर्य देखकर ऐसा लगता है मानो आगे पढ़ें
लोगों की ज़ुबान
वह शराब पी-पीकर पत्नी को प्रताड़ित किया करता था। एक दिन अचानक उसकी पत्नी भगवान् को प्यारी हो गई। उसने पत्नी की चिता पर क़सम खाई कि आगे से वह कभी शराब का सेवन नहीं करेगा। शराब पिये बिना आगे पढ़ें
सब कुछ फ़सली है
पहली दफ़ा हिचकिचाहट थी। फिर आदत बन गई। संकोच सब नष्ट हो गया। पैवंद कुर्ते पर था। उसे कब तक छुपाते रहते मुल्ला जी। पहले-पहल थोड़ा झिझके। फिर अपनी हालत का उन्हें कोई अफ़सोस नहीं रह गया था। पादा आगे पढ़ें
हास्य/व्यंग्य
एक सौभाग्यशाली बीवी के पति की मृत्युकथा
सच मानिए! गंद में रहकर, गंदा पानी पीकर, गंदा-फँदा खाकर मरने से पहले तक जितना भी जिया हूँ, ठाठ से जिया हूँ। बाज़ार से प्योर के नाम पर गंद-फंद खाकर क्या मजाल जो कभी मुझे खाँसी ज़ुकाम भी हुआ आगे पढ़ें
कंडक्टर ने सीटी बजाई और फिर कलाकार बनकर डंका बजाया
लखनऊ बस डिपो में मैं बरेली जाने वाली बस का इंतज़ार करते हुए खड़ा था। पीछे गठरिया लिए दो-चार ग्रामीण खड़े थे। मैं इधर-उधर देख ही रहा था कि पीछे खड़े एक ग्रामीण ने ज़ोर से आवाज़ लगाई, आगे पढ़ें
गाँव का खंडहर सामुदायिक भवन
हे पथिक, ज़रा ठहर! हाँ, तू ही . . . वही जो इस ऊबड़-खाबड़ सड़क पर अपनी रीढ़ को हिलाता-डुलाता जा रहा है। सड़क पर तेरा ध्यान है, पर मेरे पर कोई नज़र नहीं—मैं, गाँव का सामुदायिक भवन, जो अब आगे पढ़ें
चुनावी त्योहार
चुनावी त्योहार चल रहा था, हमारे शहर के कुछ छुट भैया नेता जो विगत कई वर्षों से दूसरे बड़े (प्लेट) नेताओं की चमचागिरी, क्षमा कीजियेगा वफ़ादारी करते चले आ रहे थे, उन लोगों की वफ़ादारी देखकर हाईकमान ने उनमें आगे पढ़ें
जनसंख्या नियंत्रण: अब कोई योजना नहीं, बस हालात
भारत में जनसंख्या नियंत्रण अब कोई सरकारी योजना नहीं रही। न नसबंदी की ज़रूरत है, न पोस्टर, न नारे, न लाल टोपी पहनकर भाषण। यह काम अब पूरी निष्ठा से पानी, खाना, दवा और व्यवस्था कर रही है। चारों आगे पढ़ें
दगड़ू चला वोट बचाने
देवकी बाबू के अय्यारों की भाँति मेरी छठी इंद्री मुझे बार बार सचेत कर रही थी कि दगड़ू कुछ न कुछ झमेला करके आया है या करने वाला है। दगड़ू एक खाटी हिन्दुस्तानी दिहाड़ी मज़दूर है जो कभी अन्नदाता आगे पढ़ें
लघुकथा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
जंबो द्वीप के बीचों-बीच आधी रात को दो वीरांगनाओं के मेल-मिलाप का संयोग बना। एक स्त्री सराय काले खां की तरफ़ से स्टेशन पर आती है और भीड़ में गुम हो जाती है। यही दिल्ली शहर का तिलिस्म है आगे पढ़ें
आलेख
आज स्वामी विवेकानंद की जन्म जयंती: धर्म और भक्ति, युवा पीढ़ी, श्रद्धा, महिला जगत तथा भारत के भविष्य के बारे में उन्होंने क्या कहा . . .
महात्मा गाँधी के सिद्धांतों और उनके योगदान को संस्थाओं, प्रकाशनों तथा पाठ्यक्रमों के माध्यम से जिस तरह जीवित रखा गया है, यदि वही प्रयास स्वामी विवेकानंद के लिए भी हुआ होता, तो राष्ट्रीय गौरव, युवा चरित्र और देश की आगे पढ़ें
ऑनलाइन गेमिंग-एक मकड़जाल
अभी कुछ माह पहले की एक घटना मन को आज भी आंदोलित कर रही है। लखनऊ में ऑनलाइन गेम फ़्री फ़ायर के जाल में फँसकर एक 13 वर्षीय किशोर जो कि कक्षा छह का छात्र था, ने आत्महत्या कर आगे पढ़ें
क्विक ऐप्स पर बढ़ती निर्भरता
गति और सुविधा का मेल कहे जाने वाले त्वरित कॉमर्स ऐप्स बड़ी तेज़ी से लोकप्रिय होते जा रहे हैं। यदि आप चाहते हैं कि आपको आपकी आवश्यकता की चीज़ें घर बैठे और तुरंत मिल जाएँ, तो ये ऐप्स बहुत आगे पढ़ें
ग्लोबल वर्कफ़ोर्स में जेन-ज़ी: एक कंपनी में औसतन 13 महीने की नौकरी
‘अप्प दीपो भवः’ इस पाली-संस्कृत वाक्य का अर्थ है—स्वयं अपना प्रकाश बनो, ख़ुद को स्वयं प्रकाशित करो। यह वाक्य भगवान बुद्ध के सभी उपदेशों का सार है। जब व्यक्ति स्वयं अपने ज्ञान का प्रकाश बनता है, स्वयं अपना मार्गदर्शक आगे पढ़ें
जय सोमनाथ: तलवार की धार, इतिहास का आकार, अस्मिता का चीत्कार
कहा जाता है कि दक्ष प्रजापति की 27 कन्याओं का विवाह अत्यंत सुंदर और तेजस्वी सोम यानी चंद्र से हुआ था। लेकिन चंद्र को अपनी 27 पत्नियों में से केवल रोहिणी ही प्रिय थी और वह उसी के साथ आगे पढ़ें
नयी शिक्षा नीति 2020 के आलोक में भारतीय ज्ञान प्रणाली
श्री आनंद दास सहायक प्राध्यापक, श्री रामकृष्ण बी. टी. कॉलेज (Govt. Aided.), दार्जिलिंग संपर्क - 27 गांधी रोड, बागमारी हाउस, दार्जिलिंग - 734101, पोस्ट ऑफिस- दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल ई-मेल - anandpcdas@gmail.com, 9382918401, 9804551685. शोध सारांश: नई शिक्षा नीति 2020 भारतीय आगे पढ़ें
भारतीय सेना दिवस
भारतीय सेना के शौर्य, बलिदान और समर्पण को सम्मान देने के लिए हर साल 15 जनवरी को भारतीय सेना दिवस मनाया जाता है। 1949 में इसी दिन, फ़ील्ड मार्शल के.एम. करिअप्पा भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ बने, जो आगे पढ़ें
मकर संक्रांति: एक विराट सांस्कृतिक और वैज्ञानिक विमर्श
(मकर संक्रांति पर विशेष-सुशील शर्मा) भारतीय मनीषा ने प्रकृति के हर परिवर्तन को उत्सव का रूप दिया है। जब सूर्य देव धनु राशि का परित्याग कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो उस संक्रमण काल को ‘मकर संक्रांति’ आगे पढ़ें
मकर संक्रांति: पतंगबाज़ी, आनंद, संस्कृति और चेतना
मकर संक्रांति का पर्व भारतीय संस्कृति में केवल एक तिथि नहीं, बल्कि ऋतु परिवर्तन, सामाजिक सहभागिता और लोकजीवन की जीवंत अभिव्यक्ति है। यह वह समय है जब सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर अग्रसर होता है और प्रकृति के आगे पढ़ें
मुक्त छंद रचनाओं में आज की हिंदी
हिंदी और समय का अटूट सम्बन्ध सज्जनों, भाषा कभी स्थिर नहीं होती। वह समय के साथ चलती है, समाज के साथ बदलती है और मनुष्य के अनुभवों से अपना विस्तार करती है। जो भाषा समय से संवाद नहीं करती, आगे पढ़ें
विलासिता: बदलती हुई दुनिया में परिभाषा की पुनर्रचना
जब हम विलासिता की बात करते हैं, तो सबसे पहले हमारी कल्पना एक ख़ूबसूरत कार, किसी अंतरराष्ट्रीय गंतव्य या पैसों से भरे कमरे की होती है। लेकिन सच कहूँ तो विलासिता का मतलब यह भी है कि आप शान्ति आगे पढ़ें
शिखर की भारतीय परिभाषा
अक्सर जब मैं हिमालय की तुंग और मौन चोटियों को निहारता हूँ, तब मन के भीतर एक सूक्ष्म किन्तु तीव्र द्वंद्व जन्म ले लेता है। क्या शिखर वास्तव में वही अंतिम बिंदु है, जहाँ पहुँचकर मनुष्य शेष संसार से आगे पढ़ें
समय के आईने में सनातन
आज का समाज तीव्र गति से बदल रहा है, पर इस परिवर्तन के साथ एक गहरी बेचैनी भी जन्म ले रही है। धर्म, परंपरा और संस्कृति जैसे शब्द सार्वजनिक विमर्श में या तो अत्यधिक आक्रामक हो गए हैं या आगे पढ़ें
सुख की चाबी मत ढूँढ़ो, ताला किसी ने लगाया ही नहीं
भगवान ने भक्त से कहा, “जा, अपने दुखों से भरा मटका उस जगह रख आओ जहाँ मैं बताऊँ और बदले में वहाँ पड़े दूसरों के दुखों से भरे मटकों में से कोई एक उठा लाना। उस मटके के आगे पढ़ें
स्वामी विवेकानंद: आधुनिक भारत के आध्यात्मिक महाप्राण
(विवेकानंद जयंती पर विशेष) युगप्रवर्तक स्वामी विवेकानंद का आविर्भाव भारतीय इतिहास की वह घटना है जिसने सोए हुए राष्ट्र के आत्मसम्मान को जगाकर उसे विश्व गुरु के आसन की ओर पुनः अग्रसर किया। 12 जनवरी 1863 को कोलकाता आगे पढ़ें
स्वामी विवेकानन्द की जयंती
भारत में स्वामी विवेकानन्द की जयंती, अर्थात् 12 जनवरी को प्रतिवर्ष राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र संघ के निर्णयानुसार सन् 1984 ई. को ‘अन्तरराष्ट्रीय युवा वर्ष’ घोषित किया गया। इसके महत्त्व का विचार आगे पढ़ें
हिंदी साहित्य को विद्रोही स्वर प्रदान करने वाले कथाकार: ज्ञानरंजन
स्मृति शेष- ज्ञानरंजन हिंदी साहित्य की दुनिया में एक ऐसा नाम है जो कहानी विधा को नई ऊँचाइयों पर ले जाने वाले रचनाकारों में शुमार रहे वे न केवल एक उत्कृष्ट कहानीकार थे, बल्कि ‘पहल’ जैसी प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका के आगे पढ़ें
समीक्षा
दलित समाज की पीड़ा को व्यक्त करती कविताएँ
पुस्तक: बंद दरवाजे (दलित-चिंतन की कविताएँ) कवि: जयपाल प्रकाशन: यूनिक पब्लिशर्स, कुरुक्षेत्र मूल्य: ₹150 (पेपर बैक) पिछले दिनों हरियाणा के चर्चित कवि जयपाल जी द्वारा लिखित काव्य पुस्तक ‘बन्द दरवाजे’ पढ़ने का अवसर मिला। इस पुस्तक में दलित चिंतन की आगे पढ़ें
संस्मरण
इतिहास से साक्षात् भेंट: योगवीर हांडा अंकल की स्मृति में
आदरणीय योगवीर हांडा अंकल एक सौ तीन वर्षों का वह सजीव इतिहास, जिनसे हुई मेरी भेंट ने मेरे जीवन को भीतर तक समृद्ध कर दिया। कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनसे मिलना मात्र एक परिचय नहीं होता, बल्कि समय आगे पढ़ें
दयारा बुग्याल: मनमोहक ट्रैक
आज 15 अक्टूबर है, 20 अक्टूबर की दीवाली है, पटाखों की धुँध ने अभी से समूचे ऐन.सी.आर. को जकड़ना शुरू कर दिया है। प्रदूषण की गिरफ़्त के साथ पटाखों के शोर से ऐन.सी.आर. का माहौल ख़ुशनुमा भी है। त्योहार आगे पढ़ें
मेरे पिता जी
8 जनवरी को मेरे पिता (ज्ञानी करतार सिंह) का जन्मदिन होता है। 22 मई, 2013 को 92½ साल की उम्र में उनका निधन हो गया था। उनका जन्म 1921 ई. में एक बहुत ही साधारण, मेहनतकश परिवार में हुआ आगे पढ़ें
विवाह प्रमाण-पत्र
दो महीने की छुट्टी काटने के बाद आज जहाज़ (भारतीय नौसेना पोत मकर) पर मेरा पहला दिन था। सुबह की सभा जहाज़ के क्वार्टर डेक (जहाज़ का पिछला खुला हिस्सा) पर शुरू हो चुकी थी। कमानाधिकारी के आते ही आगे पढ़ें
हुगली के आर-पार
यायावरी गुण है या दोष, ये तो ईश्वर जाने। इस रोग से ग्रसित हम इस बार निकल पड़े पूरब में बसे महानगर की ओर—कलकत्ता। मई का महीना और इस बार यात्रा भी निर्णीत थी और सुनियोजित भी। लीक से आगे पढ़ें
कविताएँ
शायरी
समाचार
साहित्य जगत - विदेश
विश्व हिंदी दिवस कार्यक्रम
“मातृभाषा हमारे जीवन का आधार है, हिंदी के विकास में योगदान देनेवाले ग़ैर हिंदी भाषिक विद्वानों ने अपनी मातृभाषा का…
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ब्रिटेन की डॉ. वंदना मुकेश को मध्य प्रदेश शासन, संस्कृति विभाग..
मध्य प्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा प्रतिवर्ष राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी को समृद्ध करने वाले विद्वानों को…
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यॉर्क, यूके में भारतीय प्रवासी समुदाय का ऐतिहासिक काव्य समारोह
दिनांक: 26 अप्रैल 2025 स्थान: यॉर्क, यूनाइटेड किंगडम 26 अप्रैल 2025 को यॉर्क इंडियन कल्चरल एसोसिएशन के तत्वावधान में…
आगे पढ़ेंसाहित्य जगत - भारत
डॉ. अमित धर्मसिंह के ग़ज़ल संग्रह ‘बग़ैर मक़्ता’ का हुआ..
दिल्ली। 20 दिसंबर, 2025 को आयोजित हुई नव दलित लेखक संघ की मासिक गोष्ठी में डॉ. अमित धर्मसिंह के…
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गाहलियाँ विद्यालय के छात्राओं ने आर्ट्स पेंटिंग से चमकाया..
कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश, राजकीय उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला गाहलियां के एक भारत और श्रेष्ठ भारत और इको क्लब के छात्रों…
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रामकिशोर उपाध्याय कृत ‘लालटेन’ पर परिचर्चा संपन्न-युवा..
युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच (पंजीकृत न्यास) आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना राज्य शाखा की वर्चुअल 22वीं संगोष्ठी 14 दिसम्बर-2025 (रविवार) 3:30…
आगे पढ़ेंसाहित्य जगत - भारत
मुकेश कुमार ऋषि वर्मा की कृति ‘उगता सूर्य’ का हुआ विमोचन
शाहगंज (आगरा)। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने श्री चित्रगुप्त भगवान संस्था सभागार में अपना 56वाॅं प्रांतीय अधिवेशन व शैक्षिक…
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डॉ. देवेंद्र शर्मा का काव्य संग्रह ‘अनुभव के आखर’ लोकार्पित
हैदराबाद, 15 दिसंबर, 2025— अपने दौर के अंतरराष्ट्रीय स्तर के वनस्पति शास्त्र वैज्ञानिक व कवि स्व. डॉ. देवेंद्र शर्मा…
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‘क से कविता’ का बाल-कविता समारोह संपन्न
बाल-दिवस-विशेष: हैदराबाद, 13 नवंबर, 2025। हिंदी-उर्दू कविता को नई पीढ़ी में लोकप्रिय बनाने के लिए समर्पित संस्था “क से कविता”…
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